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फायर इंजीनियरिंग विभाग

 

फायर इंजीनियरिंग विभाग

 

  • फायर सुरक्षा की अवधारणा का पहला ऐतिहासिक उल्लेख रोमन काल में मिलता है, जब सम्राट नीरो ने रोम नगर में एक भीषण आग लगने के बाद शहर को अग्निरोधक सामग्री से पुनर्निर्मित करने का आदेश दिया था। फायर इंजीनियरिंग एक स्वतंत्र अनुशासन के रूप में बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में उभरा, जब औद्योगिक विकास के साथ होने वाली आपदाओं ने इसकी आवश्यकता को उजागर किया, यद्यपि उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में कई देशों ने प्रमुख शहरों में जंगल की आग का सामना किया था। बीसवीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में अमेरिका के इलिनॉय इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में फायर प्रोटेक्शन इंजीनियरिंग में पहला डिग्री कार्यक्रम शुरू किया गया। वहीं, यूनाइटेड किंगडम में 1918 में "इंस्टीट्यूट ऑफ फायर इंजीनियर्स" की स्थापना फायर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में गहन ज्ञान की आवश्यकता को पूरा करने हेतु की गई थी।  
  • 1995 में न्यूज़ीलैंड में फायर सेफ्टी इंजीनियरिंग में पहला स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू किया गया, जिससे फायर इंजीनियरिंग को समर्पित कई उल्लेखनीय पूर्व छात्र सामने आए। इसके बाद कई अन्य संस्थानों ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाए और शीघ्र ही विश्व भर में फायर प्रोटेक्शन, सेफ्टी, इंजीनियरिंग आदि क्षेत्रों में पाठ्यक्रम प्रदान करने वाले शैक्षणिक संस्थानों की संख्या में तीव्र वृद्धि देखी गई।
  • भारत में, महान ऐतिहासिक शहर नागपुर के हृदय में स्थित राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा महाविद्यालय (NFSC) की स्थापना फायर अधिकारियों को उन्नत प्रशिक्षण प्रदान करने, मूल्यवान तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराने तथा देश में उच्च स्तर पर अग्निशमन सेवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से की गई थी। समय के साथ जब इस क्षेत्र का महत्व बढ़ने लगा, तो यह महसूस किया गया कि अग्निशमन को एक अधिक वैज्ञानिक आधार पर लाया जाना चाहिए। इसी दृष्टिकोण को लेकर कॉलेज के संस्थापक प्रो. एम.जी. प्रधान ने यह सपना देखा कि अग्निशमन के सभी तकनीकी पहलुओं को समर्पित एक ऐसा महाविद्यालय होना चाहिए, जो फायर इंजीनियरिंग जैसे विशिष्ट अनुशासन को समर्पित हो।
  • महाविद्यालय ने वर्ष 1978 में बी.टेक (फायर इंजीनियरिंग) कार्यक्रम की शुरुआत की, जो राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश के विभिन्न अग्नि जोखिम संभावित संगठनों के लिए तकनीकी रूप से दक्ष फायर इंजीनियर तैयार करना था।

    भारत सरकार ने इस प्रयास को और सशक्त किया जब वर्ष 2010 में उन्नयन योजना को स्वीकृति दी गई और उसे लागू करते हुए राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा महाविद्यालय को विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित किया गया। वर्तमान में, एनएफएससी के पास 43 एकड़ में फैला परिसर है जिसमें अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ, कक्षाएं तथा प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध हैं।

    इसके साथ ही, बी.टेक (फायर इंजीनियरिंग) पाठ्यक्रम को भी और अधिक उन्नत किया गया है, ताकि इंजीनियरिंग कौशल से युक्त युवाओं को प्रशिक्षित कर देश के प्रत्येक कोने में उच्चतम अग्नि सुरक्षा मानकों को लागू किया जा सके।

  • राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा महाविद्यालय (एनएफएससी) गृह मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन कार्यरत एकमात्र संस्थान है, जो बी.टेक (फायर इंजीनियरिंग) पाठ्यक्रम प्रदान करता है। यह महाविद्यालय न केवल भारत में, बल्कि संभवतः पूरे एशिया महाद्वीप में अपनी तरह का अद्वितीय संस्थान है।

 

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